C हम कुछ भी सोचे कुछ भी विचारे हम कुछ नहीं कर सकते है | किन्तु फिर भी हम सारे समहितों को जोड़कर कुछ भी नही कर सकते है| इसलिए कहते है होइएहे वही जो राम रची रखा फिर भी आपको अपना कर्म करते रहना है | इसलिए कहते है न कर्म्न प्रधान नर पावत नहीं ..............|